शहीद स्मारक भी चढ़ा अतिक्रमण की भेंट

0

आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार

ब्रस्पतिवार को प्रशासन द्वारा ऋषिकेश में शहीद स्मारक तोड़े जाने को लेकर विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों ने विरोध कर राज्य सरकार की जमकर आलोचना की।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी ओमी उनियाल व जगमोहन सिंह नेगी ने विभिन्न संगठनों के साथ अपना सयुंक्त बयान जारी करते हुए कहा कहा कि पिछले वर्ष सड़क चौड़ीकरण मे अटकलों क़ो ध्यान मे रखते हुए जिलाधिकारी से वार्ता क़ी गई थी, तत्कालीन जिलाधिकारी ने स्वयं कहा था क़ि शहीदो एवं स्मृतियों क़ो संजोया जाऐगा यह हमारे राज्य क़ी धरोहर है। यदि कुछ ऐसा होगा तो आप सभी क़ो विश्वास मे लेकर आगे कार्य होगा।
जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती व सुदेश सिंह व सुरेश नेगी ने सयुंक्त रूप से अपने बयान में कहा क़ि सरकार ने आंदोलनकारियों को विश्वास में लेकर अपनी मंशा पहले ही साफ कर दी थी कि आंदोलनकरी प्रतिभाओं के स्मारक तोड़े नही जायँगे। उसके बावजूद आंदोलनकारियों के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। सर्व प्रथम त्रिवेन्द्र सरकार ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का कार्यालय बन्द किया। और आज तक राज्य आंदोलनकारी संगठनो से संवाद नही किया जा सका। आज ऋषिकेश मे शहीद स्मारक तोड़कर साबित कर दिया क़ि राज्य सरकार आंदोलनकरियो की पक्षधर नही है उन्होंने दिवंगत आंदोलनकारियों क़ी शहादत क़ो कभी भी नही समझा। और ना हीं कभी राज्य आन्दोलन के शहीद परिवारो की सुध ली ।
राज्य आंदोलनकारी मंच ने इसकी कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा क़ी जिस आंदोलन के खातिर राज्य का गठन हुआ। आज उस राज्य की सरकार आंदोलन के शहीदों को भुला हुए उनका अस्तित्व मिटाने में तुली है। सभी आंदोलनकारी संगठनों ने इस घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *