कानून का उलंघन करने वाले बक्शे नहीं जायेंगे : राज्य सूचना आयुक्त
देहरादून। उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के प्रावधानों की अवहेलना करने और जनता को समय पर सही सूचना उपलब्ध न कराने के मामलों में एक कड़ा संदेश दिया है। राज्य सूचना आयुक्त की अदालत द्वारा शिकायत संख्या 16838 में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है।
जिसमें राज कुमार सूरी द्वारा दिनांक 14.02.2026 को नगर निगम, देहरादून से भूमि से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों हेतु 6 बिंदुओं पर आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
कानून का उलंघन : आयोग ने इसे लोक सूचना अधिकारी के वैधानिक दायित्वों में गंभीर लापरवाही और जानबूझकर सूचना छिपाए जाने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया।
सुनवाई के दौरान तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी / उप नगर आयुक्त तनवीर सिंह मारवाह द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाते हुए, आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के अंतर्गत ₹10,000/- (दस हजार रुपये मात्र) की शास्ति (जुर्माना) अधिरोपित की है। यह धनराशि नियमानुसार दो माह के भीतर दो समान किस्तों में राजकोष में जमा करानी होगी।
भविष्य के लिए सख्त चेतावनी: आयोग ने नगर निगम, देहरादून के प्राधिकारी/नगर आयुक्त को भी निर्देशित किया है कि भविष्य में प्रत्येक आरटीआई आवेदन का निस्तारण पूरी जिम्मेदारी और समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो।
यह आदेश आरटीआई अधिनियम के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
