पीएम दरबार में विवेकानंद खंडूरी की दरकार पर टिका युवाओं का भविष्य

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लम्बे संघर्षो की अजब होती है दास्तान, मुश्किल हालत भी बदल जाते है कभी-कभी….

जीत उन्ही की होती है जो छोड़ते नहीं दामन उम्मीद का, पानी की बूँद के तरसने वालों पर बरस जाते है बादल कभी – कभी….

कुछ हाल ऐसा है राज्य की शिक्षा पद्धति का जिसको लेकर वरिष्ठ राज्य आंदोलंकारी एवं पूर्व छात्र अध्यक्ष विवेकानंद खंडूरी के भागीरथ प्रयासों ने पीएम दरबार में अपनी बात रखते हुए एक बार फिर सरकार को मजबूर कर दिया है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी के नाम पर राज्य के बड़े महाविद्यालय का अस्तित्व खत्म करना इतना आसान नहीं है। इस मामले को लटकाया जाना युवाओं के भविष्य को अंधकार में भेजने जैसा है। राहत की बात ये है की पीएम दरबार मे इन बिंदुओ पर सरकार का निर्णय युवा छात्रों के पक्ष मे एक उम्मीद की किरण लेकर आया है। अगर ऐसा हुआ तो इस पर विवेकानंद खंडूरी के संघर्षो पर सफलता की एक नई इबारत लिखी जाएगी।

यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के दस कालेजों की संबद्धता समाप्त किए जाने के असंवैधानिक फैसले की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर की थी। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय ने तीन बार टेलीफोनिक वार्ता की। इसके पश्चात कालेजों की संबद्धता समाप्त किए जाने के प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुए, प्रधानमंत्री कार्यालय ने दिशा निर्देश जारी कर, एच.एन.बी.ग. सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल को निस्तारण हेतु भेज दिया। इसके बाद ही एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया सीईयूटी के आधार पर कराने के साथ-साथ पूर्व की भांति इण्टर की मेरिट के आधार पर शुरू की है।
ज्ञातव्य हो कि, एच.एन.बी.ग. यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने 30 मई 2023 को उक्त दस कालेजों की संबद्धता समाप्त कर दी थी। इसके साथ इन सभी दस कॉलेजों को श्री देव सुमन यूनिवर्सिटी से संबद्धता लेने के लिए कहा गया। यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के इस विवादित निर्णय के खिलाफ प्रभावित सभी दस कॉलेजों ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय से स्थगनादेश ले लिया है। वर्तमान में यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के इस विवादित निर्णय के चलते कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया भी बाधित हुई है। अभी भी प्रभावित कालेजों में सीटें रिक्त हैं।

1 thought on “पीएम दरबार में विवेकानंद खंडूरी की दरकार पर टिका युवाओं का भविष्य

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