कितनी उचाइयां क्यों न हो पर ना छोड़े अपनी जड़ें….मीनाक्षी कंडवाल

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बेबाक़ी लफ्जों की मल्लिका मीनाक्षी कंडवाल का प्रेस क्लब में जोरदार स्वागत

देहरादून। हमेशा से पहाड़ ने अपनी खूबसूरती के साथ जीवनशैली व संस्कृति को लेकर अनगिनत किवदंती के रूप में अपनी पहचान कराई है जब भी पहाड़ के किसी भी नौना य नोनी ने अपने उत्कृष्ट कार्यों से देश का नाम रोशन किया तो ऐसे में हर बार पहाड़ का जिक्र लोगों की जुबां पर आ ही जाता है। आज प्रेस क्लब की टीम ने जिस शख्स के हाथों बच्चों को सम्मानित कराया उस शख्स का नाम मीनाक्षी कंडवाल है जो देश की सुविख्यात टीवी एंकर व पत्रकार है। इनका कहना है कि कितनी भी उचाइयां हो पर अपनी जड़े कभी ना छोड़े। उत्तराखंड प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध राज्य है। हम पहाड़ वालों की सबसे बड़ी ताकत हमारी निच्छलता-हमारा भोलापन है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी समाज चाहे किसी भी क्षेत्र में हो, अपनी बोली-भाषा, संस्कृति, पहनावे और अपने रीति-रिवाजों पर गर्व करना चाहिए।

मीनाक्षी कंडवाल आज दोपहर यहां उत्तरांचल प्रेस क्लब की ओर से क्लब के डॉ. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल सभागार में आयोजित ‘छात्र प्रोत्साहन समारोह व संवाद’ कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं से बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता मुखातिब थीं। खचाखच भरे सभागार में मौजूद क्लब सदस्यों, पत्रकारों, पत्रकारिता के छात्रों व विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से अपने अनुभव 7साझा करने के साथ ही उन्होंने पर्वतीय समाज, बोली-भाषा, संस्कृति व पत्रकारिता से जुड़े तमाम सवालों के भी प्रभावी ढंग से जवाब दिए।
बच्चों को पहाड़ के प्रतीकों-नायकों के बारे में बताएं माता-पिता:
उन्होंने कहा कि आज अगर हमारे बच्चे हमारे पहाड़ के प्रतीकों हमारे नायकों के बारे में ज्यादा नहीं जानता तो यह बच्चों का दोष नहीं है, यह हमारी गलती है। इसलिए, हमें हमारे घरों में बच्चों को अपने नायकों, अपनी संस्कृति, बोली-भाषा, हमारे लोक देवताओं के बारे में लगातार बताना चाहिए। उन्हें इस पर गर्व करना सिखाना चाहिए। हम कहीं भी रहें और किसी भी क्षेत्र में कितनी भी ऊंचाईयां छू लें, हमे अपनी जड़ों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। वही पेड़ विशाल और छायादार-फलदार होता है, जिसकी जड़ें मजबूत और गहरी होती हैं। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है इस बात पर कि आज भी हमारे पहाड़ के लोग आज भी बहुत मेहनतकश हैं। आज भी बहुत प्यारे हैं और आज भी ‘क्रूर’ दुनिया में इंसानियत की मिसाल हैं।
खबरों की निष्पक्षता के लिए दोनों पक्षों की गहन जानकारी जरूरी:
मीनाक्षी ने कहा कि नेशनल मीडिया की खबरों में पहाड़ को आमतौर पर आपदा या यात्रा या फिर राजनीतिक उठापटक के दौरान ही जगह मिलती रही है। इसके पीछे कई वजह होती है। हालांकि, अब यह स्थिति बदल रही है। उन्होंने कहा कि खबरों में निष्पक्षता के लिए यह जरूरी है कि हम एकदम सीधे देखने के बजाय अपने दाएं और बाएं भी देखें। अगर हम दाएं की बात करते हैं, तो हमारा समुचित अध्ययन बाएं के बारे में भी होना चाहिए। उन्होंने पत्रकार के लिए निरंतर अध्ययनशील होने-निरंतर पढ़ने-लिखने को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हमारी भाषा, हमारा आचरण मर्यादित और शालीन रहे। यदि ऐसा होता है, तो हम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सीजेआई या किसी से भी सवाल करने की स्थिति में होते हैं।
पत्रकार मीनाक्षी कंडवाल ने कार्यक्रम में इस वर्ष की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले क्लब सदस्य पत्रकारों के 13 बच्चों को स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र व कलम-डायरी भेंट कर प्रत्साहित किया। इससे पूर्व क्लब अध्यक्ष जितेंद्र अंथवाल ने सभी का स्वागत करते हुए मुख्य अतिथि का परिचय दिया। संचालन क्लब महामंत्री ओपी बेंजवाल ने किया। क्लब की सृजन समिति के संयोजक दिनेश कुकरेती ने सभी का आभार व्यक्त किया। कनिष्ठ उपाध्यक्ष गीता मिश्रा, संयुक्त सचिव नलिनी गोसाईं ने पुष्पगुच्छ देकर मीनाक्षी कंडवाल का स्वागत किया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनमोहन शर्मा के साथ ही पूर्व अध्यक्ष विकास धूलिया, भूपेंद्र कंडारी, नवीन थलेड़ी, पूर्व महामंत्री संजीव कंडवाल व गिरिधर शर्मा ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंट किया। क्लब कार्यकारिणी सदस्य महेश पांडे व प्रवीन बहुगुणा ने मीनाक्षी कंडवाल के पति अमित रैना को पहाड़ी टोपी पहनाकर सम्मानित किया। बीएफआईटी के छात्रों व फैकल्टी के साथ ही बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर जाने-माने ऑर्केस्ट्रा गायक अलेक्जेंडर ने गीत की सुमधुर प्रस्तुति दी।
सम्मानित किए गए छात्र-छात्राएं—
अथर्व शैली, कृतिका बहुगुणा, आर्यन राणा, मैत्रेयी पांथरी, अंशित सेमवाल, आयुष कोठारी, कोमल झा, आर्यन कुमार, मेघा कुमारी, सौम्या सूद, गर्विता डोभाल, हर्षिता भट्ट, व तन्वी डंडरियाल

3 thoughts on “कितनी उचाइयां क्यों न हो पर ना छोड़े अपनी जड़ें….मीनाक्षी कंडवाल

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