नहीं रहे भुवन चंद्र खंडूरी ! प्रदेश मेँ तीन दिन का राजकीय शोक

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देहरादून। दमदार सुशासन व कुशल अनुशासन के जरिये  मुख्यमंत्री के रुप मेँ उत्कृष्ट पहचान बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे और देहरादून में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड समेत राजनीतिक और सैन्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रदेश मेँ तीन दिन का राजकीय शोक रहेगा। समस्त  जनपदों के सरकारी कार्यालयों मेँ राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बी.सी. खंडूरी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवा दी और अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किए गए थे। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख के रुप मेँ अपनी उत्कृष्ट पहचान बनाई।

खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार वर्ष 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक उन्होंने प्रदेश की कमान संभाली। उन्हें उत्तराखंड में साफ-सुथरी छवि, अनुशासित प्रशासन और ईमानदार राजनीति के लिए जाना जाता था। उनके कार्यकाल में सड़क, प्रशासनिक सुधार और सुशासन को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

वे केंद्र सरकार में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में कार्य किया। देश के महत्वाकांक्षी “स्वर्णिम चतुर्भुज” और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खंडूरी जी का उत्तराखंड के विकास और सुशासन में योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी। वर्ष 2025 में उनकी ब्रेन सर्जरी भी हुई थी और हाल के महीनों में उन्हें देहरादून के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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