केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर किया तीखा प्रहार…….
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महिला आरक्षण गरिमा, प्रतिनिधित्व और वास्तविक सशक्तिकरण का विषय है: प्रधान
देहरादून। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर तीखा प्रहार किया, जिससे महिला आरक्षण कानून को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई।
यह प्रतिक्रिया खड़गे की उस टिप्पणी के बाद आई, जिसमें उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने में कांग्रेस की भूमिका को रेखांकित किया और इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
इस पर जवाब देते हुए प्रधान ने कहा कि “महिला आरक्षण गरिमा, प्रतिनिधित्व और वास्तविक सशक्तिकरण का विषय है” और इसे राजनीतिक श्रेय की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की महिलाओं को “परिणाम चाहिए, न कि बार-बार किए जाने वाले ऐसे वादे जो कभी वास्तविकता में नहीं बदलते।”
मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि महिला आरक्षण कानून, *नारी शक्ति वंदन अधिनियम*, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दशकों की देरी के बाद पारित किया गया।
उन्होंने उल्लेख किया कि 25 वर्षों से अधिक समय तक संसद में महिलाओं के लिए सीट आरक्षण का मुद्दा “लंबित वादा” बना रहा, जिस पर बार-बार चर्चा हुई लेकिन उसे लागू नहीं किया गया।
प्रधान ने कहा कि अब संसद ने 106वां संविधान संशोधन पारित कर दिया है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए *एक तिहाई आरक्षण* का प्रावधान किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं, जिससे यह भारतीय संविधान का हिस्सा बन गया है।
कार्यान्वयन को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि यह संशोधन जनगणना के बाद होने वाली अगली परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसे उन्होंने संघीय संतुलन और प्रतिनिधित्व में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक संवैधानिक आवश्यकता बताया।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों तक महिला आरक्षण को लागू करना है, जिसके लिए विधानमंडलों की संरचना में आवश्यक समायोजन जैसे कदम उठाने होंगे।
परिसीमन और सीटों के संभावित विस्तार पर श्री प्रधान ने कहा कि सरकार सभी संवेदनशीलताओं से अवगत है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनसंख्या स्थिरीकरण में योगदान देने वाले किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि उद्देश्य महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनिधित्व का विस्तार करना है, बिना किसी राज्य की आवाज को कम किए।
सहयोग की अपील करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि यदि कांग्रेस महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे संसद में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए और इस सुधार के क्रियान्वयन में बिना और देरी के सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत की महिलाओं को परिणाम चाहिए, देरी नहीं।”