विचार कन्नै जरूरत छ…….
रंत रैबार ब्यौरो……
एक और गणतंत्र दिवस ऐकि चल गये। एक बात ज्व सबि समारोहों मा एक जनि है वो छ आजादी का शहीदों हैं श्रद्धांजलि अर चूंका पराक्रम व राष्ट्रभक्ति को यशोगान।
ये दिन पर हमुन पिछला साल कि अपेक्षा अबा सालै तमाम उपलब्ध यों को बखान करे अर देश कि जनतान देखि कि दिल्ली का राजपथ पर ज्व झांकी निकनी छन वु हमरा गणतांत्रिक देश कि तरक्की कि निशाणी छ। चै वु रक्षा का क्षेत्र मा हो नै देश कि अंदरूनी औद्योगिक संस्कृक्तिक तरक्की य देशवास्यों कि विशिष्ट उपलब्धयों को शानदार प्रदर्शन। सब कुछ देखी भले ही हम पुलकित होंदा अर गौरवान्वित मैसूस कर्दा कि भारत देश बि दुन्य का दूं चंद देश कि पंगत मा खड़ों हवे ग्ये पर एक झांकी वृंमा य नि होदी कि कै ढंग से धाम बरखा अर बूंदा दिनु मा एक किसाण खेती कैरी देशवास्यों खुण रोटी कमौणू छ। यु नि दिखै जांदो कि दिन भर मजूरी कै जब एक श्रमिक श्याम वक्त घर पौंछद त वेकि जनानि वेतैं सबसे पैलि पुछद कि आदु ल्है वि छै कि न।
गणतंत्र परेड देखी भारत दुन्य कि महाशक्ति का रूप मा भले ही प्रदर्शित करे जांद। यी परेड़ मा नि दिखै जांदो कि एक रूप्य अगर दिल्ली बटी गौं का एक किसाण खुण जारी होंद त वे मा सिर्फ दस पैसा हि पौंछदन।
हम गौरव मैसूस कर्दा दिल्ली का राजपाथ पर जब कलफ लगीं कड़क यूनिफार्म पैर्या हाथुमा राइफल अ मुख पर शैर्य पूर्ण मुस्कान ल्हेकि चल्न वळा सिपै हि वु भारतीय छन जु कि देशवास्यों तैं रात खुण चैन से सेणै आजादी देदन। हैंकी तर्फ देश का नेता वातानुकूलित कमरों मा बैठी देश कि स्थिति पर गप्पबाजी कर्द। गणतंत्र परेड़ मा औद्योगिक विकास का अलावा उत्पादन का क्षेत्र मा देश कि उपलब्धि प्रदर्शित कर्य जांदन। यु बि बतै जांद कि हम फलण-फलण क्षेत्र मा आत्मनिर्भर छां पर एक हौर पहल जु कि नि दिखै जांदो अर वु छ राशन, तेल अर गैस जनि जरूरी चीज्यों तैं जुटौंणो देश को गण कथगा परेशान्यूं से दिन रात संघर्ष कनू छ।
वास्तव मा राजधानी कि सड़क्यों पर गणतंत्र को प्रदर्शन करे जांद। वस्तुस्थिति कमोवेश बिल्कुल उल्टी छ। वु सिर्फ दिखौणा दांत छन। खाणा दांत ते गिचा भितर हि रैंदन। वु कैतै दिखै नि देंदा। भारी फर्क ऐग्ये गण अर तंत्र का बीच कि खाई मा।
दुन्य का सबसे बड़ा गणतंत्र भारत का एक हि काळो पक्ष छ कि यख हर आदिम अलग-अलग समूह से सम्बद्ध छ। कुछ प्रांतवाद का कीला पर बच्या छन त कुछ जातिवाद का रोग से ग्रसित छन। कुछ भाई-भतीजा वाद अर क्वी धर्म का कीलों का ओरपोर परिक्रमा कना छन। अगर नीछ तं देशप्रेम को जज्बा। यूं खूटों मा बध्या हम भारतवासी साक्यों बटी दुसरा हैं। नोचु दिखौण पर लग्यां छां। यी वजै रै कि सैकड़ों वर्ष हम गुलामी का अभिशाप से ग्रसित रयां। कबि महमूद गजनवी की जना लुटेरा ऐकि यीं ध रती हैं कुर्ची, लूटी, भ्रष्ट कैरी चल जांदन त कवि मुहम्मद गौरी देश कि रियासतों का बीच चल्दी अहं कि टकराहट को फैदा उठैकि पृथ्वीराज का आंखो फोड़ी हमारि अस्मिता को बर्गबान कैरी चल जांद। कबि मुगलों न अपणि स्वार्थ सिद्धि का वास्ता धर्म तैं कट्टरता को आधार बणैकि मनख्यात का गळा मा खुटु धैरी एक छात्र राज करि। अगर क्वी यांका सिलाफ खड़ो हवे त वेका हि अपण लोग वेका दगड़ि दगाबाजी कैरी मुंगलों का चाटुकार बणी अपणु अस्तित्व बचौंद नजर ऐनि। अंग्रेजों न फूट डाळो अर राज करा कि नीति अपणै कि हम पर राज करे। देश कि अकूत सम्पदा से इंग्लैंड तैं समृद्धि का शिखर पर ल्हेकि चल ग्येनि। अर आज जबकि हम आजाद छां त हमरा हि लोग अपणो को शोषण कन मा विदेश्यों सि कम नि छना। जरूरत छ अपना गणतंत्र तैं मजबूत कन्नै कि ताकि सही मायना मा हम भारत का नागरिक बणी कि अपना देश की सेवा कर सका अर याकि खुशहाली वास्ता काम करा। पर यूं तभी संभव छ जब हम यीं दिशा मा ईमानदारी सि काम करून।