सहकारिता मेले का भव्य आयोजन ! 670 सहकारी समितियां पूरी तरह डिजिटल, उत्तराखंड बना देश का मॉडल राज्य..

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सहकारिता के ज़रिए किसानों, महिलाओं और युवाओं को मिल रहा सीधा लाभः मुख्यमंत्री…..

महिला सहकारिता और स्वयं सहायता समूहों को 5-5 लाख रुपये के ब्याजमुक्त ऋण…..

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज रेंजर्स ग्राउंड, देहरादून में आयोजित सहकारिता मेला 2025 में प्रतिभाग किया। यह आयोजन “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025” एवं उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता मेला केवल उत्पादों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सहकारिता शक्ति, ग्रामीण आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सहकारिता भारतीय जीवन पद्धति का मूल संस्कार रही है, जहां व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के सामूहिक हित के लिए कार्य करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धा युग में सहकारिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, इसी को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने के लिए देश में अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन एक ऐतिहासिक निर्णय है, जिसे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मजबूती से आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आज सहकारिता सुधारों में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। पूरे देश में बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण की शुरुआत उत्तराखंड से हुई और आज प्रदेश की सभी 670 सहकारी समितियां पूर्णतः डिजिटल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जहां पहले किसान दफ्तरों के चक्कर काटता था, वहीं आज मोबाइल फोन के माध्यम से सभी सेवाओं से जुड़ रहा है-यही कांग्रेस के कागजी मॉडल और भाजपा के जमीनी मॉडल का अंतर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारी समितियां अब केवल ऋण देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयां, कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में बीमा, पेंशन, बिजली बिल, आधार एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं कभी बोझ मानी जाती थीं, वे आज जनता के लिए सुविधा केंद्र बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सहकारी समितियों का डेटा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पर अपलोड किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और सहकारी संस्थाओं को ब्याज मुक्त ऋण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। आज सहकारी बैंकों में हजारों करोड़ रुपये की जमा पूंजी जनता के बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सहकारिता समितियों और स्वयं सहायता समूहों को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे लाखों महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को केवल नारे दिए, जबकि भाजपा सरकार ने अवसर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की पहचान और   संस्कृति की रक्षा के लिए भी संकल्पबद्ध है। अवैध कब्जों, लैंड जिहाद और अवैध संरचनाओं पर सख्त कार्रवाई की गई है। अवैध मदरसों पर कार्रवाई, ऑपरेशन कालनेमि और समान नागरिक संहिता इसी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल विरोधी कानून लागू कर युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया गया है, जिसके चलते हजारों युवाओं को बिना पचÊ-बिना खचÊ सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय नौकरी बिकती थी, जबकि आज योग्यता के आधार पर अवसर मिल रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर सरकार की नीति स्पष्ट बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीरो टॉलरेंस के तहत कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगाकृ चाहे वह बड़ा अधिकारी हो या छोटा कर्मचारी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नाबार्ड द्वारा प्रकाशित “स्टेट फोकस पेपर 2026-27, उत्तराखंड” का विमोचन किया तथा सहकारी समूहों को पांच-पांच लाख रुपये के ब्याज मुक्त ऋण के चेक भी वितरित किए। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहकारिता मेला आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक जनआंदोलन बनेगा और प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने के सरकार के “विकल्प रहित संकल्प” को और अधिक मजबूती देगा। राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत, विधायक खजान दास, सविता कपूर सहित सहकारिता विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय जनता उपस्थित रही।

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