कलम के सिपाही : ईश्वर प्रसाद उनियाल, जिनकी लेखनी आज भी दिखा रही समाज को राह…..

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गढ़वाली भाषा, संस्कृति और लोकचेतना के संरक्षण में ईश्वर प्रसाद उनियाल का अस्मरणीय योगदान…..

 

देहरादून।आज मैंने (घनश्याम चन्द्र जोशी, संपादक आकाश ज्ञान वाटिका एवं सचिव आकाश शिक्षा एवं सांस्कृतिक विकास समिति) वरिष्ठ पत्रकार ईश्वर प्रसाद उनियाल से उनके आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और एक पौधा भेंट कर शुभकामनायें दी गईं। उनसे आत्मीय भेंट में उनके लंबे पत्रकारिता अनुभव, सामाजिक सरोकारों और भाषा के प्रति समर्पण पर गहन चर्चा हुई, जो बेहद प्रेरणादायी रही।

पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी ईश्वर प्रसाद उनियाल उत्तराखंड की पत्रकारिता के ऐसे सशक्त स्तंभ हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल खबरों को धार दी, बल्कि समाज को दिशा देने का काम भी किया। 1980 में दैनिक दून दर्पण से उप संपादक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले उनियाल जी ने गढ़वाली दैनिक “गढ़ ऐना” में कार्यकारी संपादक के रूप में अहम भूमिका निभाई।

वर्तमान में वे दैनिक ‘शिखर संदेश’ के संपादक और ‘रंत रैबार’ साप्ताहिक के प्रधान संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
गढ़वाली भाषा, संस्कृति और लोकचेतना के संरक्षण में उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें हिलांस अवार्ड, महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल सम्मान, डॉ. गोविंद चातक स्मृति साहित्य सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

आज भी उनकी निर्भीक और सशक्त लेखनी समाज को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा रही है।